Poetry

कर्ज़

मेरी लाश पर गिद्ध बनकर मंडराना ज़रूर और नोंच -नोंच खाना मेरे बदन का ज़र्रा – ज़र्रा के दुआ देगी तुझे ये रूह मेरी जो मौत पे ही सही , इस बदक़िस्मत को तूने छुआ तो कभी नियति का ख़ेल आज यहाँ ख़त्म होता है के जिन नापाक लबों ने हमें बेग़ैरत किया था भरी … Continue reading

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वफ़ा

वो आए हमारी चौखट पर आँखों में एक नशा सा लिए अंधेरों की मेहफिल में मानो शमा का वो चिल्मन जलने की ही देरी थी तन्हाई का आलम ढलने में मानो उनके दस्‍तक की ही देरी थी उस एक साँस मे हम थे, वो थे, और वो भरा पैमाना और थम गया था वक़्त में … Continue reading

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सवाल

वो जो दबे पाओं आती है , मेरी साँसों के ज़रिये , हर पल अपना एहसास कराती हुई , पूछती है यह सवाल के- तू जीता क्यों नहीं ? ज़िन्दगी ये तमाम – इसके ज़ाम तू पीता क्यों नहीं ? उगते सूरज के उजाले से , मेरी दुनियाँ को करती जगमग , जो खिलखिलाती सी, … Continue reading

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याऱी

जो दोस्तों की मेहफ़िलें सजा करती थी कभी,दिलवालों का फिर एक मेला लगा करता था..उन हवाओं की बात ही कुछ और थी यारों,उन फिजाओं में यारी का धुआँ भी तो उठा करता था.. जो हसता था कोई, तो कोई रोया करता था,कभी सुख, तो कभी यहाँ दुःख भी तो बटा करता था..जो राह तेरी, वो … Continue reading

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बाज़ार

ये हुस्न का बाज़ार , ये अदाओं की मेहफ़िल..ये दिल के व्यापारी , ये हसीनाओं की तहसील ..बिनभूले हम यहाँ रोज़ चले आएँ , तो गलत ही क्या है ..जो दिल को थोड़ा सहला ले आज – तो गलत ही क्या है ..  अंधेरों में चलने वालों को क्या सही, क्या गलत,हमारी तो ज़िंदगी खुद … Continue reading

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Children

For very few things in life are unadulterated and pure, Even fewer untouched by the filth of this world; To be so clean and yet stay just that way- are our children, Let us know what they are worth.   I smile when I see one smile, And I cry hard when one does; The … Continue reading

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The Bird

The sound of emptiness reverberates in me, The dread of the dark is terrifying. What once was pleasant calm to me, is now sadistically amplified.   I am trapped deep in the abyss of loneliness, Inescapable, entwined in the shackles of the good old past. What was supposed to be my flight, is now just … Continue reading